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हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय: गुरमीत राम रहीम बरी {28-05-2024}

22 साल पहले हुए रणजीत सिंह हत्याकांड में हाईकोर्ट ने दी राहत

हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय: 10 जुलाई 2002 की शाम को सिरसा डेरा के प्रबंधक गुरमीत राम रहीम बरी, 22 साल पहले रणजीत सिंह हत्याकांड में मारा गया था। 2003 में सीबीआई को मामले की जांच सौंप दी गई थी। डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को जांच के बाद सीबीआई ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

22 साल पहले हुए रणजीत सिंह हत्याकांड में हाईकोर्ट ने दी राहत

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने राम रहीम को बहुचर्चित रणजीत सिंह हत्याकांड मामले में बड़ी राहत देते हुए उसे दोषमुक्त करार दिया है। राम रहीम को इस मामले में सीबीआई की अदालत ने दोषी करार देते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई थी।

गुरमीत राम रहीम के वकील जतिंदर खुराना ने बताया कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला बदल दिया है जिसमें सभी पांच लोगों को बरी कर दिया गया था। हम इस निर्णय को सराहते हैं।

राम रहीम ने उम्र कैद की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। उसकी अपील पर मंगलवार को हाई कोर्ट ने सीबीआई की अदालत का निर्णय रद्द कर दिया। पूर्ण आदेश अभी आना बाकी है।
डेरे का प्रबंधक रणजीत सिंह सिरसा था। 22 साल पहले, रणजीत सिंह को शक की वजह से मार डाला गया था। रणजीत सिंह कुरुक्षेत्र, हरियाणा के निवासी थे। रणजीत सिंह कुरुक्षेत्र, हरियाणा के निवासी थे। 10 जुलाई 2002 को उन्हें गोली मार दी गई।

एक गुमनाम साध्वी ने स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी को एक पत्र लिखा था। पत्र में राम रहीम को जांच करने की मांग की गई थी। डेरा प्रबंधन को शक था कि रणजीत सिंह ने अपनी बहन से साध्वी यौन शोषण की गुमनाम चिट्ठी लिखी थी।

यह गुमनाम पत्र है जिसे सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति ने हाल ही में अपने समाचार पत्र “पूरा सच” में प्रकाशित किया था। इसके परिणामस्वरूप 24 अक्तूबर 2002 को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति पर हमला किया गया और उन्हें गोली मार दी गई। रामचंद्र 21 नवंबर 2002 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में मर गया था।

2003 में सीबीआई को जांच दी गई थी: रणजीत सिंह के बेटे जगसीर सिंह ने पुलिस जांच से असंतुष्ट होकर जनवरी 2003 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने सीबीआई जांच की मांग की थी। हाईकोर्ट ने बेटे का पक्ष लिया और केस को सीबीआई को सौंप दिया। सीबीआई ने मामले की जांच करते हुए राम रहीम समेत पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। 2007 में आरोपियों पर कोर्ट ने चार्ज फ्रेम लगाए थे। शुरू में मामले में डेरामुखी का नाम नहीं था, लेकिन 2003 में जांच सीबीआई को सौंपने के बाद 2006 में राम रहीम के ड्राइवर खट्टा सिंह के बयान के आधार पर डेरामुखी का नाम इस हत्याकांड में शामिल हुआ।

2021 में, गुरमीत राम रहीम सहित पांच दोषियों को सीबीआई की अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। राम रहीम सिंह को साध्वी यौन शोषण मामले में दो दशकों की सजा सुनाई गई है। राम रहीम अभी सुनारिया जेल में है।

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