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Uttarakhand में वन विनाश: यह आग कब बुझ जाएगी? धधकते जंगलों में धुएं से सांस लेना मुश्किल, पर्यावरण को भारी नुकसान {28-04-2024}

Uttarakhand में वन विनाश: यह आग कब बुझ जाएगी? धधकते जंगलों में धुएं से सांस लेना मुश्किल, पर्यावरण को भारी नुकसान
कुमाऊं समेत पूरे राज्य में जंगलों की आग ने पूरे पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुंचाया है। धुएं ने जंगली जानवरों और आम लोगों को सांस लेना मुश्किल कर दिया है। वनाग्नि के कारण वन्य जीव अपनी जान बचाने के लिए हर जगह भाग रहे हैं। जंगल की आग कई गांवों में लोगों तक पहुंच गई है। जंगलों में आग लगने की घटनाओं ने पिछले महीने तेजी से बढ़ी है।

Uttarakhand में वन विनाश: यह आग कब बुझ जाएगी? धधकते जंगलों में धुएं से सांस लेना मुश्किल, पर्यावरण को भारी नुकसान

एक अप्रैल से 27 अप्रैल तक राज्य में 559 वनाग्नि घटनाएं हुईं। इनमें कुमाऊं क्षेत्र की 318 घटनाएं भी हैं। इस दौरान राज्य में 689 हेक्टेअर वन क्षेत्र थे इस दौरान राज्य में 689 हेक्टेअर वन संपदा को नुकसान हुआ है। जलते जंगलों से पर्यावरण विद, स्थानीय लोगों और सरकार भी चिंतित हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग गंभीरता दिखाता नहीं है जब आवश्यक है. जब परिस्थितियां नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं, विभाग, आला अफसरों से लेकर जनप्रतिनिधियों को वनाग्नि और हो रहे पर्यावरणीय नुकसान की याद आती है।

नैनीताल वन विभाग में 28 घटनाएं हल्द्वानी में हुईं। नैनीताल जिले में छह वन प्रभाग हैं, जिसमें नैनीताल वन प्रभाग भी शामिल है। 15 फरवरी से अब तक इन क्षेत्रों के जंगलों में 76 घटनाएं हुई हैं। इसमें करीब 91 हेक्टेयर वन संपदा नष्ट हो गई। नैनीताल वन प्रभाग भी इसमें सबसे अधिक घटना हुई है। संबंधित अवधि में इस विभाग में 28 वनाग्नि की घटना हुई है। इसके अलावा, पिथौरागढ़ में 69 घटनाएं, बागेश्वर में 11 घटनाएं, चंपावत में 37 घटनाएं, अल्मोड़ा में 43 घटनाएं और ऊधम सिंह नगर में 41 घटनाएं हुई हैं।

एयरफोर्स ने लड़ियाकांटा में अपने उपकरणों को आग से बचाने के लिए विभिन्न झीलों से पानी लेने की अनुमति मांगी, डीएम वंदना ने बताया। भीमताल झील से ही एयरफोर्स ने पानी लिया है। हेलीकॉप्टर से आग बुझाने में अधिक सफलता मिलती है जहां धुएं की विजिबिलिटी कम होती है। शनिवार को हेलीकाप्टर के साथ लगभग पच्चीस लोग और शुक्रवार रात लगभग सत्तर लोग एयरफोर्स स्टेशन के बाहर काम कर रहे थे। भवाली के पाइंस-लडियाकांटा क्षेत्र में ग्राउंड पर फारेस्ट टीम ने अभियान चलाया और जंगल में आग पर काबू पाने में मदद मिली।

2016 में एयरफोर्स का हेलीकॉप्टर पहुंचा था: राज्य के जंगलों में भारी आग लगी थी 2016 में इस आग पर काबू पाने के लिए एयरफोर्स से मदद मांगी गई थी। इसके तहत गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों में अभियान चलाया गया था। उस समय भी हेलीकॉप्टर ने भीमताल झील से पानी भरकर वनाग्नि से प्रभावित क्षेत्रों में पानी डाला था।

डीएम और एसएसपी सड़क किनारे आग लगने पर फायर करेंगे

मंडलायुक्त दीपक रावत ने कहा कि सड़क किनारे आग लगने पर संबंधित जिलों के डीएम और एसएसपी फायर ब्रिगेड की निगरानी करेंगे। उनका कहना था कि वनाग्नि से प्रभावित गांवों के ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की समीक्षा बैठक में भाग लेने के बाद आयुक्त ने वनाग्नि को लेकर अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वन विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारी मिलकर वनाग्नि की घटनाओं पर काम करें।

कुमाऊं कमिश्नर ने शासन को तराई पूर्वी वन प्रभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश की है। 21 अप्रैल को खटीमा हाईवे पर एक वनकर्मी आग बुझाने की कोशिश करता मिला, कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने बताया। तराई पूर्वी वन प्रभाग के डीएफओ को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। स्थिति को देखते हुए, प्रमुख सचिव वन को स्थिति से अवगत कराया गया है और कुछ करने की सलाह दी गई है।

• आयुक्त ने कहा कि शनिवार शाम चार बजे तक पिथौरागढ़, बागेश्वर, चंपावत और ऊधमसिंह नगर में कोई आग नहीं लगी।

• डीएम नैनीताल, बागेश्वर एवं अल्मोड़ा ने पीआरडी और होमगार्ड की तैनाती की हैवनों में आग लगने से वन्यजीव आबादी तक पहुंच रहे हैं शनिवार को बंगापानी मार्केट के पास घुरड़ देखा गया। आग लगने और प्यासे होने से कई जानवर आबादी छोड़ रहे हैं। इन पशुओं के जंगल की आग से एक ओर खतरा है, तो दूसरी ओर लोगों के आसपास कुत्तों और शिकारियों के हमलों से मारे जाने की आशंका है। ऐसे में इन वनस्पतियों को बड़ा खतरा खड़ा हो गया है। Locals ने वन विभाग से वनों में आग लगाने वालों पर कार्रवाई करने की मांग की है।

तीन डिविजनों को वाहन दिए गए: डीएम हल्द्वानी डीएम वंदना ने बताया कि नैनीताल, हल्द्वानी और रामनगर वन प्रभागों के लिए दो-दो वाहन जंगल की आग के लिए उपलब्ध कराए गए हैं। क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी कोटाबाग ने हल्द्वानी वन प्रभाग को 10 स्वयंसेवक, रामनगर वन प्रभाग को 30 स्वयंसेवक, खंड विकास अधिकारी कोटाबाग ने रामनगर वन प्रभाग को आठ स्वयंसेवक और क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी बेतालघाट ने नैनीताल वन प्रभाग को छह स्वयंसेवक प्रदान किए हैं।

बागेश्वर के कलक्ट्रेट क्षेत्र में जंगल की आग से संचार केबल जली, जिसे नियंत्रित करने में चार घंटे से अधिक का समय लगा। स्वान केंद्र की संचार केबल आग से जल गई। शनिवार को इंटरनेट ठप होने से लगभग चालिस विभागों का कामकाज प्रभावित हुआ।

पिथौरागढ़ में जंगलों में लगी आग से एक जला चीड़ का पेड़ बिजली की 33 केवी लाइन पर गिर गया, जिससे 125 गांवों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। लाइन टूटने से क्षेत्र के 125 गांवों को बिजली नहीं मिली है। रविवार को आपूर्ति बहाल होगी। जंगलों में आग लगने से चीड़ों के पेड़ सुलग रहे हैं। यह पेड़ गिरने पर विद्युत लाइनों को नुकसान पहुंचाते हैं।

शनिवार देर शाम झूला देवी मंदिर के पास जंगल में आग लग गई, जिससे रानीखेत में धुएं से एक घंटा आवाजाही ठप रही। हवा के साथ बेकाबू लपटों ने जंगल के बड़े क्षेत्र को घेर लिया। इस दौरान, झूला देवी मंदिर जा रहे पर्यटकों सहित चौबटिया जाने वाले वाहन धुएं के कारण आगे नहीं चल पाए। करीब एक घंटे तक आवाजाही प्रभावित हुई।

सूचना मिलने पर अग्निशमन विभाग की टीम ने आग पर नियंत्रण पाया और फिर वाहन रवाना हुआ।
मैग्नेसाइट फैक्टरी तक पहुंची जंगल की आग: जंगल की आग ने मैग्नेसाइट फैक्टरी के माइंस कार्यालय को पूरी तरह से नष्ट कर दिया। माइंस कार्यालय के बारह कमरे टिनशेड में थे, जो आग की चपेट में आ गए। कमरों में रखे गए कंप्यूटर, फर्नीचर और मशीनें भी जल गए। 20 से 25 लाख रुपये का नुकसान आग से हुआ है।

इस दौरान, झूला देवी मंदिर जा रहे पर्यटकों सहित चौबटिया जाने वाले वाहन धुएं के कारण आगे नहीं चल पाए। करीब एक घंटे तक आवाजाही प्रभावित हुई।

सूचना मिलने पर अग्निशमन विभाग की टीम ने आग पर नियंत्रण पाया और फिर वाहन रवाना हुआ।
CHC देवालय में जंगल की आग से ऑक्सीजन प्लांट जल गया, अल्मोड़ा जिले में जंगलों की आग बेकाबू हो गई और तबाही मचा रही है। सल्ट के CHSC देवालय में जंगल की आग ने ऑक्सीजन प्लांट और कार्यालय को जला दिया। वन विभाग की टीम और फायर ब्रिगेड मौके पर नहीं पहुंचे। स्वास्थ्य कर्मियों ने आग को नियंत्रित करके बड़ी दुर्घटना से बचाया।

शनिवार को हाईकोर्ट के आवासीय क्षेत्र में आग बुझाई गई, जिले में कई जगह सुलग रहे जंगल पाइंस जंगल में लगी आग। वन विभाग और दमकल विभाग की टीम ने आग को किसी तरह नियंत्रित किया। वन विभाग ने कहा कि आग बुझाने के लिए 600 वनकर्मी और फायर वाचर जुटे हैं।शहरों में बहुत से जंगल सुलग रहे हैं। नैनीताल से भुजियाघाट, भवाली से नैनीताल और कालाढूंगी से नैनीताल तक कई किलोमीटर की दूरी पर आग लगी है। शनिवार को गेठिया, एरिज और देवीधूरा क्षेत्र में आग लगी। वर्तमान में आग पर नियंत्रण पाया गया है, डीएफओ चद्रशेखर जोशी ने बताया।

शनिवार को बेतालघाट ब्लॉक के हरोली, मझेड़ा, मल्ला डोबा और सिमलखा के जंगल सुबह से शाम तक आग से धधकते रहे। वहीं, ताडीखेत ब्लॉक के ज्याड़ी में आग लगी। देर शाम तक जंगलों में लगी आग बुझ नहीं पाई। इधर, ओखलकांडा के जंगलों में भी लगातार आग लगी रहती थी। ओखलकांडा में आग लगने से सड़क पर पेड़ गिरते रहे|इससे सड़क यातायात प्रभावित हुआ। ओखलकांडा ब्लॉक प्रमुख कमलेश कैड़ा ने हल्द्वानी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर जंगल में लग रही आग को नियंत्रित करने के लिए और अधिक कर्मचारियों की नियुक्ति की मांग की।

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