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Lok Sabha चुनाव 2024: दक्षिण में 132 सीटों का ऐसा इतिहास है, 400 से अधिक सीटों के लिए भाजपा क्या करेगी? {06-01-2024}

Lok Sabha चुनाव 2024

Lok Sabha चुनाव 2024

Lok Sabha चुनाव 2024: दक्षिण भारत में पांच राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में 132 लोकसभा सीटें हैं। 2019 में भाजपा और कांग्रेस ने दक्षिण की 132 सीटों में से 29-29 सीटें जीतीं। वहीं, दूसरे दलों ने 74 सीटें जीतीं।
साल के शुरू होते ही लोकसभा चुनावों में गड़बड़ बढ़ी है। विपक्षी गठबंधन में सीटों के बंटवारे पर बहस जारी है। भाजपा के नेताओं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा, देश भर में रैलियां और रोड शो कर रहे हैं।

 

साल की शुरुआत होते ही प्रधानमंत्री मोदी केंद्र शासित लक्ष्यद्वीप और दक्षिणी राज्य केरल पहुंचे। उन्होंने यहां कई कार्यक्रमों में भाग लिया। रोड शो और रैली भी की। भाजपा का मिशन दक्षिण, कई राजनीतिक विश्लेषकों का नाम है।

दक्षिण की राजनीतिक गणित क्या है? भाजपा ने अब तक देश के दक्षिणी भाग में क्या किया है? कांग्रेस यहाँ क्या कर रही है? दक्षिण से लोकसभा में कितनी सीटें आती हैं? राज्य में किस पार्टी का बहुमत है? आइए जानते हैं..।

लोकसभा में दक्षिण: देश के दक्षिण से 132 सीटें लोकसभा में हैं। तमिलनाडु इनमें सबसे बड़ा राज्य है। यहां से चुने गए कुल 39 सांसद हैं। कर्नाटक से 28, आंध्र प्रदेश से 25 और केरल से 20 सांसद लोकसभा में जाते हैं। इसी तरह पुडुचेरी, लक्ष्यद्वीप और अंडमान निकोबार से 17 सांसद चुने जाते हैं, तेलंगाना से 17। दक्षिण भारत के पांच राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 132 लोकसभा सीटें हैं।

2019 में भाजपा ने दक्षिण में क्या देखा?

भाजपा और कांग्रेस ने पिछले लोकसभा चुनाव में दक्षिण की 132 सीटों में से 29-29 सीटें जीतीं। वहीं, दूसरे दलों ने 74 सीटें जीतीं। इनमें डीएमके ने तमिलनाडु की 24 सीटें और वाईएसआर कांग्रेस ने आंध्र प्रदेश की 22 सीटें जीतीं। भाजपा ने केवल दो राज्यों में जीत हासिल की थी।पार्टी ने 28 में से 25 सीटें जीतीं। वहीं, पार्टी ने तेलंगाना के 17 में से चार सीटों पर जीत हासिल की थी। भाजपा का खाता अन्य राज्यों में भी नहीं खुला था।

2019 में कांग्रेस के लिए दक्षिण का रण कैसा रहा?

कांग्रेस को केरल में सबसे अधिक सफलता मिली। पार्टी ने 20 में से 15 सीटों पर जीत हासिल की। 39 सीटों वाले तमिलनाडु में पार्टी ने आठ जीते। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने डीएमके के साथ गठबंधन में चुनाव जीता था। कांग्रेस ने राज्य की नौ सीटों में से आठ में जीत हासिल की। इसी तरह, डीएमके ने 24 सीटों पर चुनाव जीता।विरोधी AIDEM सिर्फ एक सीट से संतोष करना पड़ा। तेलंगाना में कांग्रेस ने तीन सीटें जीतीं।

कांग्रेस तेलंगाना में हाल ही में सत्ता में आई है। इससे पहले, पार्टी ने कर्नाटक में भी जीत हासिल की थी। 2019 में, उसे सिर्फ एक सीट से संतोष करना पड़ा। इसके अलावा, पार्टी ने अंडमान-निकोबार और पुडुचेरी में एक-एक सीट जीतने में भी सफलता हासिल की।

भाजपा का प्रदर्शन दक्षिण में अब तक कैसा रहा है?

2019 के लोकसभा चुनाव में 300 से अधिक सीटें जीतने वाली भाजपा के लिए दक्षिण एक बड़ी चुनौती थी। 2019 में भाजपा का प्रदर्शन इसके बाद भी सर्वश्रेष्ठ था।2019 से पहले भाजपा ने दक्षिण में 25 से अधिक सीटें कभी नहीं जीत सकी थीं।

भाजपा ने इससे पहले दक्षिण में 22 सीटें जीती थीं। 2014 में उसने यह प्रदर्शन किया था। इस इलाके में पिछले कई चुनावों से चुनाव दर चुनाव पार्टी की सीटें बढ़ रही हैं। 2009 में पार्टी को 20 सीटें मिलीं, 2004 में 18 सीटें मिलीं, 1999 में 19 सीटें मिलीं, 1998 में 16 सीटें मिलीं। पार्टी ने इससे पहले के चुनावों में दक्षिण में 10 सीटें भी नहीं जीती थीं।

भाजपा ने अपने गठन के बाद 1984 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में दक्षिण में जीत हासिल की। आंध्र प्रदेश में उसे सीट मिली। 1989 में उसे सीट नहीं मिली। 1991 में पार्टी ने कर्नाटक में चार सीटें और आंध्र प्रदेश में एक सीट जीती। वहीं, 1996 में पार्टी ने छह दक्षिण सीटें जीतीं। सभी सीटें कर्नाटक में थीं।

कांग्रेस के लिए दक्षिण के परिणाम

1989, पिछले दस चुनावों में दक्षिण में कांग्रेस का सबसे अच्छा प्रदर्शन हुआ था। पार्टी ने इस क्षेत्र में 110 सीटें जीती थीं। 2014 में सबसे कम 19 सीटें मिली थीं। 2019 में पार्टी ने अपने प्रदर्शन में सुधार किया और 29 सीटों पर जीत हासिल की। 2014 से पहले के नतीजों से यह हालांकि बहुत कम था।2004 में कांग्रेस ने 48 सीटें दक्षिण में जीती थी, जबकि 2009 में 62 सीटें जीती थीं। इसी तरह, दक्षिण से कांग्रेस ने 1999 में 35, 1998 में 45, 1996 में 37, 1991 में 92 और 1984 में 71 सीटें जीतीं।

भाजपा दक्षिण की राजनीति में अपनी उपस्थिति को कैसे बढ़ाना चाहती है?

साल की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी ने दो दिन के दौरे पर केरल पहुंचा था। लक्ष्यद्वीप में भी उनके कई कार्यक्रम हुए। PM मोदी ने केरल में महिलाओं से भी बातचीत की। भाजपा ने आयोजन से पहले ही घोषणा की कि दो लाख महिलाएं इस संवाद में भाग लेंगी। वैसे भी, भाजपा ने महिलाओं की सफलता का बड़ा कारण बताया है। भाजपा का 2024 का चुनाव कार्यक्रम इस पूरे दौरे से जुड़ा हुआ है। ये पहला मौका नहीं है जब भाजपा ने दक्षिण पर ध्यान दिया है। बीते एक वर्ष में ही बहुत से ऐसे संकेत मिले हैं।

मई में देश की नई संसद की स्थापना हुई। उस समय इसकी भव्यता और विशेषताओं के बारे में इतनी चर्चा हुई कि लगभग ढाई हजार साल पहले चोल वंश के राजाओं को सत्ता हस्तांतरण के दौरान दिया गया था सेंगोल (राजदंड)।

राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस राजदंड को लोकसभा में तमिल मठों के धर्माचार्यों का आशीर्वाद लेकर शुरू किया है, जिससे इसका तमिलनाडु पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। उस समय राजनीतिक विश्लेषक उमेश नारायण पंत ने अमर उजाला से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले कुछ समय में तमिलनाडु पर काफी ध्यान दिया है। 2022 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने लोकसभा क्षेत्र बनारस में काशी तमिल समागम का आयोजन करेंगे। 300 से अधिक साधु संत और प्रमुख मठों के धर्माचार्यों ने एक महीने तक चलने वाली इस बैठक में भाग लिया। पिछले महीने इसका दूसरा चरण भी था।

भाजपा का नवीनतम नारा दक्षिण को क्यों विचलित करता है?

भाजपा ने नए साल पर ही एक नवीन चुनावी नारा पेश किया। इसमें कहा गया कि देश में मोदी सरकार की तीसरी बार आएगी। भाजपा ने इसके लिए 400 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। इसलिए, दक्षिण भारत में सीटें जीतना बहुत महत्वपूर्ण है। दक्षिण से 132 सीटें खत्म होने के बाद देश में 411 सीटें रहती हैं।

भाजपा को इनमें से 25 से अधिक सीटें अपने सहयोगियों को देनी होगी। जिनमें हरियाणा की जजपा, यूपी में अपना दल और बिहार की लोजपा शामिल हैं। इसके अलावा शिवसेना और एनसीपी का अजित पवार गुट भी महाराष्ट्र में है। भाजपा को 400 पार का नारा पूरा करना होगा तो दक्षिण में बड़ी सफलता चाहिए।

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