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सांसदों का निलंबन: शीतकालीन सत्र में रिकार्ड निलंबन का इतिहास{19-12-2023}

दोनों सदनों के 92 सांसदों को निलंबित किया गया

इतिहास में दूसरी बार: शीतकालीन सत्र में 92 सांसदों का निलंबन

रिकार्ड सांसदों को रोका गया: शीतकालीन सत्र में, देश के संसदीय इतिहास में पहली बार दोनों सदनों के 92 सांसदों को निलंबित किया गया था, जिसमें विपक्षी सांसदों ने संसद की सुरक्षा में चूक का मुद्दा उठाया था। साथ ही, कार्यवाही में बाधा डालने के लिए विरोधी सांसदों पर कठोर कार्रवाई की गई। सत्र में अब तक 92 विरोधी सांसद निलंबित हो चुके हैं। सांसदों के निलंबन के इतिहास को जानें..।

13 दिसंबर को संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा की कार्यवाही के दौरान सुरक्षा में चूक की गंभीर घटना हुई। केंद्र सरकार के खिलाफ विरोधी सांसद इस घटना के बाद से एकजुट हो गए हैं। विपक्ष सरकार से संसद की सुरक्षा में सेंध और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से प्रतिक्रिया की मांग की जा रही है। विपक्षी सदस्यों ने इस मांग को लेकर दोनों सदनों में जमकर हंगामा किया।

कठोर कार्रवाई और विरोधी सांसदों पर प्रतिबंध

नियमों के उल्लंघन और लोकसभा और राज्यसभा में भारी नारेबाजी के बाद कई विपक्षी सांसदों को शीतकालीन सत्र से निलंबित कर दिया गया। शीतकालीन सत्र में अब तक 92 विरोधी सांसदों को निलंबित किया गया है। पिछले गुरुवार को राज्यसभा से एक सांसद और लोकसभा से 13 सांसदों को निलंबित कर दिया गया था। सोमवार को लोकसभा से 33 और राज्यसभा से 45 सांसदों की निलंबन हुई। यह किसी भी सत्र में निलंबित सदस्यों की सर्वाधिक संख्या है।

इतिहास में सर्वाधिक संख्या में सांसदों का निलंबन

1989 में निलंबित आंकड़ों के अनुसार 63 सांसद थे वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, 1963 में सांसदों ने निलंबन की पहली शिकायत की। संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने भाषण दिया। इस दौरान कुछ सदस्यों ने हंगामा किया और सदन छोड़ दिया। इन सांसदों को बाद में निलंबित कर दिया गया। 1966 में, दो राज्यसभा सदस्यों को दिनभर की कार्यवाही से निलंबित कर दिया गया। 1989 में राजीव गांधी सरकार ने सबसे अधिक सांसदों को निलंबित किया था। जब 63 सांसदों को एक साथ तीन दिन के लिए अवकाश दिया गया। इंदिरा गांधी की हत्या को लेकर बनी ठक्कर कमीशन की रिपोर्ट उस समय बहुत चर्चा में थी।

निलंबन के इतिहास की झलकियां

2010 के बाद, निलंबन की कार्रवाई बढ़ी 2010 में महिला आरक्षण बिल पर सदन में भारी बहस हुई। सांसदों ने जमकर नारेबाजी की, तख्तियां लहराईं, बिल की कॉपी फेंक दीं और काली मिर्च का स्प्रे किया। इसके बाद सात सांसदों को राज्यसभा से बाहर कर दिया गया। यह मार्च 2010 में बजट सत्र के दौरान हुआ था।

2012 में बजट सत्र के दौरान तेलंगाना से आने वाले कांग्रेस के आठ सांसदों को चार दिन के लिए सदन से बाहर कर दिया गया। ये सांसद अलग तेलंगाना राज्य की मांग कर रहे थे। 12 सासंदों को अगस्त 2013 में मानसून सत्र के दौरान पांच दिन के लिए निलंबित कर दिया गया था ठीक एक महीने पहले, इसी सत्र में आंध्र प्रदेश के नौ सांसदों को भी निलंबित कर दिया गया था। सदन में नए राज्य तेलंगाना का गठन करने का बिल पेश होने पर भारी हंगामा हुआ। इस दौरान, फरवरी 2014 में तेलंगाना गठन का विरोध करने वाले 16 सांसदों को पूरे सत्र से बाहर कर दिया गया था।

मोदी सरकार के दौरान सांसदों का निलंबन तेजी से बढ़ा है, जो पिछले नौ वर्षों में पहली बार हुआ है। 2018 में मोदी सरकार ने पहले भी कई सांसदों को निलंबित किया था। तेलगू देशम पार्टी और एआईएडीएमके के 45 सांसदों को जनवरी 2019 में शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने दो दिन के लिए निलंबित कर दिया था। टीडीपी सांसदों ने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की। वहीं, तमिलनाडु के एआईएडीएमके सांसदों ने कावेरी नदी पर बनाए जा रहे डैम का विरोध किया।

जुलाई 2018 के मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस के छह सांसदों को पांच दिन की निलंबन दी गई थी। इस दौरान, विपक्ष मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर बहस की मांग कर रहा था। 2020 के मानसून सत्र में आठ सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया था।केंद्र सरकार द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों के खिलाफ ये सांसद हंगामा कर रहे थे। निलंबन के बाद, इन सांसदों ने रात भर गांधी की प्रतिमा के सामने धरना भी दिया।

2020 के बजट सत्र में ही कांग्रेस के सात सांसदों को पूरे सत्र से निलंबित कर दिया गया था। इन सांसदों पर लोकसभा अध्यक्ष की मेज से कागजात छीनने का आरोप लगाया गया था। दिल्ली में हुए दंगों पर चर्चा की मांग को लेकर उस वक्त विपक्षी सांसद हंगामा कर रहे थे। एक हफ्ते बाद निलंबित सांसदों को वापस ले लिया गया।

2021 में मानूसन सत्र में पेगासस जासूस कांड, किसानों के आंदोलन और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर बहुत बहस हुई। हंगामे के दौरान Senate session तय समय से दो दिन पहले ही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई। इस दौरान भी बहुत बहस हुई। हंगामे के कारण टीएमसी के छह सांसद सदन से बाहर कर दिए गए। 2021 के शीतकालीन सत्र के पहले दिन ही राज्यसभा के 12 सांसदों को निलंबित कर दिया गया।

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