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आयोध्या: नए सिरे से बसती है ‘सोने की नगरी’, रामनगरी में वैभव और समृद्धि की कहानी {16-01-2024}

Ayudhya: लंका अब नहीं..।तुलसीदास ने मानस में कहा है कि अयोध्या सोने की नगरी है, नए सिरे से बस रही है रामनगरी, चार साल में जमीन की कीमत दस गुना बढ़ी है, जे गुर चरन रेनु सिर धरहीं। ते जनु सकल बिभव बस करहीं..।

अयोध्या सोने की नगरी
अयोध्या सोने की नगरी

यानी गुरु के चरणों की रज मस्तक पर धारण करने वाले सभी ऐश्वर्य को नियंत्रित कर लेते हैं। रामायण में रावण की लंका सोती हुई दिखाई दी। अयोध्या आज भी सोती हुई है। यहां की अर्थव्यवस्था पर्यटन और निवेश से दस कदम आगे बढ़ गई है।

तुलसीदास ने मानस में कहा है – ‘अयोध्या सोने की नगरी है’, और आज यह शहर नए सिरे से बस रहा है रामनगरी। चार साल में ज़मीन की कीमतों में दस गुना वृद्धि हुई है, जबकि धरोहर के स्वरुप यहाँ की अर्थव्यवस्था भी पर्यटन और निवेश से चमक रही है।

गत चार वर्षों में अयोध्या को नए सिरे से बनाने के लिए सरकार ने लगभग ३१ हजार करोड़ रुपये का निवेश किया है। यह पिछले वर्षों में उत्तर प्रदेश के किसी भी जिले में किए गए निवेश से अधिक है। 2017–2018 के दौरान यहां जमीन के लगभग छह हजार सौदे हुए। 2022–2023 में बिक्री साढ़े चार गुना बढ़कर 27,000 हो गई।

एक साल में पर्यटकों की संख्या सवा दो लाख से सवा दो करोड़ हो गई। जमीन की कीमत केवल चार वर्षों में दस गुना बढ़ गई। 30 वर्ष पहले इस शहर में कोई नहीं आना चाहता था। लोगों ने कहा कि इस नगरी को माता सीता ने श्राप दिया है। नई पीढ़ी काम नहीं करती थी, इसलिए घर खाली हो गए। किंतु राममंदिर से जुड़े धार्मिक पर्यटन ने नई अयोध्या को जन्म दिया है।

जमीन की कीमतें बढ़ती जा रही हैं: प्रॉपर्टी डीलर बृजेंद्र दुबे लगभग दस साल से जमीन खरीद-फरोख्त कर रहे हैं। उसने कहा कि चार साल पहले एक हजार रुपये प्रति वर्ग फुट की आसानी से उपलब्ध जमीन आज चार हजार रुपये प्रति वर्ग फुट भी नहीं मिलती थी। अब एक हजार से अधिक लोग इस काम से जुड़े हैं, जबकि पहले 10 से 20 लोग ही जुड़े थे। कोसी परिक्रमा के आसपास जमीन की कीमत पांच लाख रुपये थी। अब ३० लाख में मिलता है। शहर में रामपथ पर जमीन की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं। दो वर्षों में प्रति वर्ग फुट की कीमत एक हजार से छह हजार रुपये हो गई है।

बाजार दर बहुत अधिक है, सरकार का सर्किल रेट कम है, और बाजार दर बहुत अधिक है। दैनिक रूप से सैकड़ों रजिस्ट्री होती हैं। सरकार भी इससे परेशान है। सर्किल रेट बढ़ाने के लिए कई बार प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन यह अभी नहीं हुआ है, एक अफसर ने बताया। सरकार का विचार है कि सर्किल रेट बढ़ने से उसे अधिक मुआवजा देना होगा।

यद्यपि सरकार को भविष्य में जितना मुआवजा नहीं देना पड़ेगा, उससे अधिक राजस्व में नुकसान होगा। यही कारण है कि लक्ष्य के सापेक्ष आय नहीं मिल पा रही है। 2023-24 वित्तीय वर्ष के दिसंबर महीने में 1,028.81 लाख रुपये की आय हुई, जो निर्धारित लक्ष्य का 74.71 प्रतिशत था।

राम मंदिर ट्रस्ट ने अयोध्या की नव निर्मित नगरी में अब तक सबसे बड़ी संपत्ति संभाली है। बैकुंठ धाम के पास 14 हजार 730 वर्गमीटर जमीन ट्रस्ट ने प्राप्त की। 55 करोड़ 47 लाख 800 रुपये का राजस्व इससे सरकार को मिला। टाउनशिप को विकसित करने के लिए आवास विकास प्राधिकरण ने 1,194 एकड़ जमीन भी खरीदी।

• बैनामे की कमी: विभागों द्वारा अधिग्रहण की गई जमीन की बिक्री में कमी आई है। अधिग्रहण के आसपास की जमीन मूल्यवान हो गई है। किसान भी बेच नहीं रहे हैं। इसमें सहादतगंज से नयाघाट मार्ग, गोसाईगंज बाईपास के आसपास के गांव, हवाई पट्टी और राजेपुर उपरहार प्रवेश द्वार, दर्शन नगर रेलवे स्टेशन, पंचकोसी परिक्रमा मार्ग, चौदह परिक्रमा मार्ग और चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग के आसपास की जगह है।

लोढ़ा ग्रुप ने सरकार से भी अधिक दाम दिए, बृजेंद्र दुबे बताते हैं। इस समूह ने किसानों को सरकारी सर्किल दर के चार गुना से छह गुना अधिक कीमत दी। इस समूह ने अयोध्या से बाहर राजेपुर क्षेत्र के बीच में रामपुर हलवारा नामक एक शहर बनाने के लिए जमीन खरीद ली। 2020 तक, बिस्वा जमीन का मूल्य 50 हजार रुपये था। आज कीमत चार लाख रुपये बिस्वा है।

मलावन के युवा अनूप पांडेय गुजरात में काम करते थे जब वे अपने शहर लौट रहे थे। यहां के बढ़ते अवसरों और वैभव को देखते हुए, वह नौकरी छोड़कर कार खरीदकर पर्यटकों के लिए काम करता है। लोढ़ा ग्रुप ने सरकार से भी अधिक दाम दिए, बकौल बृजेंद्र दुबे। इस समूह ने किसानों को सरकारी सर्किल दर के चार गुना से छह गुना अधिक दाम दिए। इस समूह ने राजेपुर क्षेत्र के बीच में अयोध्या से बाहर रामपुर हलवारा में एक शहर बनाने के लिए जमीन खरीद ली। 2020 तक, बिस्वा जमीन 50 हजार रुपये मिल रही थी। आज बिस्वा का मूल्य चार लाख रुपये हो गया है।

मलावन के युवा अनूप पांडेय ने गुजरात में काम खो दिया और अपने शहर लौट गए। यहां के बढ़ते वैभव और संभावनाओं को देखते हुए, वह नौकरी छोड़कर कार खरीदकर पर्यटकों के लिए काम करता है। कहते हैं कि अब घर पर काम किया जा सकता है। प्रयागराज के इंजीनियर बृजेश पाठक ने अपनी नौकरी छोड़ दी और आयुर्वेदिक दवा बनाने लगे हैं। अविनाश दुबे ने नौकरी छोड़ दी है और गुड़ बनाने लगा है। गुड़ की कीमत 50 रुपये से 5 हजार रुपये प्रति किलो तक है। गुड़ में भी स्वर्ण भस्म डाला जाता है। चंडीगढ़ से लौटकर अरविंद चौरसिया यहां एक डोसा की दुकान चला रहे हैं।

विकास ट्रैवल्स लखनऊ के अशोक तिवारी ने बताया कि दो साल पहले तक लखनऊ से अयोध्या के लिए महीने में 25 से 30 गाड़ियां ही बुक होती थीं, लेकिन अब ऐसा आठ गुना बढ़ा है। अब हर साल 200-240 गाड़ियां बुक होती हैं। इसमें परिवार के लिए अधिक पुस्तकें भी हैं। लखनऊ में ट्रैवल्स वाले ही हर दिन दो सौ से अधिक गाड़ी बुक कर रहे हैं, एक अनुमान है।

वाहनों की बिक्री पिछले दो साल में छह गुना बढ़ी है, आरटीओ आरपी सिंह ने बताया. पिछले दो साल में वाहनों के पंजीकरण की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। विशेष रूप से ई-रिक्शा छह गुना तक पहुंच गए हैं।

वाहनों की संख्या

2021-22, 2022-23, 2023-24, चार पहिया वाहन: 2384, 2372, 1854, ई रिक्शा: 591, 2727, 2399, टेंपो: 86 374 494, मोटर कैब: छह सीटर: 22 49 75, मैसी कैब: 6 42 35 (वित्तीय वर्ष 2023-24 में तीन माह शेष हैं)।)

तस्वीरें उदाहरण हैं..।

तस्वीर रामनगर में वैभव और आस्था की बानगी हैं। नई अयोध्या का पहला चित्र महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का है। पहले चरण में 1450 करोड़ रुपये की लागत आई है। यहां छह जनवरी से उड़ान भी शुरू हुई। यहाँ हर वर्ष लाखों लोग आते हैं, ऐसा अनुमान है। अब अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन भी अद्भुत है। वहीं, दुनिया की सबसे बड़ी 108 फुट लंबी अगरबत्ती की दूसरी तस्वीर है। मंगलवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने इसे प्रज्वलित किया।

45 दिन तक इस अगरबत्ती की सुगंध पूरी अयोध्या को सुगंधित करती रहेगी। यह अगरबत्ती 3.5 फुट चौड़ी है और 3610 किलो वजन है।यह प्रकृति के अनुकूल है। इसे बनाने में 376 किलो नारियल के गोले, 1470 किलो गाय का गोबर, 420 किलो जड़ी बूटियां और 190 किलो घी का इस्तेमाल किया गया था।

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