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ठगी का नवीन उपाय: डिजिटल अरेस्ट को डराकर-झांसा देकर करते थे..।क्या है डिजिटल अरेस्ट {21-01-2024}

साइबर ठगी करने वाले एक गिरोह को डिजिटल अरेस्ट किया गया है। ग्रेटर नोएडा, हरदोई और दिल्ली से दिल्ली पुलिस ने मां-बेटे सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

क्या है डिजिटल अरेस्ट
क्या है डिजिटल अरेस्ट

इंडोनेशिया, मलयेशिया और अन्य देशों में अवैध माल भेजने का आरोप लगाकर आरोपी फंसाए गए। खुद को क्राइम ब्रांच और सीबीआई का अधिकारी बताकर भयभीत करके जालसाजी की।

क्या है डिजिटल अरेस्ट , जिसमें मां-बेटे सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है?

दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (आईएफएसओ) ने इंडोनेशिया, मलेशिया, दुबई समेत कई देशों से साइबर ठगी करने वाले एक गिरोह का खुलासा किया है। इस मामले में मां-बेटे सहित चार आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।गिरोह ने पीड़ितों को भयभीत करके डिजिटली गिरफ्तार करके पैसे वसूल लिए।

 

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में मास्टर माइंड बिसरख, ग्रेटर नोएडा निवासी खुशबू खान, उसके बेटे आसिफ खान, दिल्ली निवासी चौधरी संजय और हरदोई के लखनऊ रोड निवासी अजय सिंह शामिल हैं। हजारों लोगों ने इस गैंग से ठगी की है।स्थिति की गम्भीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक दिन में उनके तीन बैंक खातों में 13 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है। पुलिस को शक है कि गिरोह कई देशों में है। यह लोग ठगी का पैसा डॉलर में बदलकर क्रिप्टो और बिटकाइन विदेश में खरीदते हैं।

खुशबू के पति मोइज खान को पुलिस ने खोज लिया है। उन्हें एक लैपटॉप, एक कार, आठ मोबाइल फोन, चार चेकबुक, चार एटीएम कार्ड और अन्य सामान के अलावा पुलिस ने उनके एक बैंक खाते से 34.50 लाख रुपये बरामद किए हैं। आरोपियों ने 65 वर्षीय पूर्व एयर इंडिया मैनेजर से 35 लाख रुपये ठगी की थी।

स्पेशल सेल के आईएफएसओ के पुलिस उपायुक्त डॉ. हेमंत तिवारी ने बताया कि सफदरजंग की एक महिला अंजना चक्रवर्ती ने पिछले दिनों साइबर ठगी की शिकायत दी थी। एक कूरियर कंपनी ने उनसे फोन किया। कॉलर ने कहा कि जॉन डेविड को कोई कंबोडिया पार्सल भेजा जा रहा है।

मुंबई कस्टम ने उसकी जांच करते हुए 150 ग्राम मादक पदार्थ, तीन क्रेडिट काड, एक लैपटॉप, साढ़े चार किलो कपड़े और २० फर्जी पासपोर्ट पाए। मामला दर्ज करने की चर्चा हुई। उन्हें सीबीआई अधिकारी बनकर राजीव गुप्ता ने वीडियो कॉल की। पीड़िता को भयानक डिजिटल अरेस्ट कर दिया गया था। उनसे कहा गया था कि वह वीडियो कॉल को डिस्कनेक्ट नहीं करेंगी। पीड़िता से धीरे-धीरे 35 लाख रुपये ठगे गए।

तकनीकी जांच से आरोपियों तक पहुंचने पर पुलिस आईएफएसओ ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की जांच एसीपी जय प्रकाश और इंस्पेक्टर देवेंद्र दहिया ने शुरू की। पुलिस ने मास्टर माइंड खुशबू खान और उसके बेटे आसिफ को बिसरख, ग्रेटर नोएडा के एक अपार्टमेंट से गिरफ्तार किया, बैंक खातों की डिटेल के आधार पर। निहाल विहार ने उनके साथी चौधरी संजय को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया, जबकि अभय को हरदोई से गिरफ्तार कर लिया गया। मामले में खुशबू के पति मोइज खान को पुलिस ने तलाश किया है।

डिजिटल अरेस्ट करने वाले आरोपी पीड़ितों के पैन, आधार, बैंक खातों और मोबाइल नंबर का पता लगाकर उनसे फोन करते थे। उन्हें अपने जाल में फंसाने के लिए कूरियर के जरिये विदेश में ड्रग्स, पासपोर्ट और अन्य खतरनाक सामग्री भेजने के नाम पर डराया जाता था। मुंबई क्राइम ब्रांच, सीबीआई और अन्य एजेंसियों के नाम पर इसके बाद धमकी दी गई।पीड़ितों को आरोपी पुलिस वर्दी में वीडियो कॉल करके डराया गया।

उन्हें फर्जी थाने का वातावरण भी दिखाया जाता था, जिससे वे और भी भयभीत हो जाते थे। आरोपियों ने पीड़ितों से कहा कि वे वीडियो कॉल को डिस्कनेक्ट करने से डिजिटल अरेस्ट करेंगे। ऐसा करने पर गिरफ्तारी का भय दिखाया गया। पीड़ितों को इस दौरान बड़ी रकम दी जाती थी।

पकड़े गए आरोपियों में से एक है खुशबू खान, जो मूल रूप से पश्चिम बंगाल की रहने वाली है। वह ग्रेजुएट है। आसिफ, इसका बेटा, अभी बीबीए कर रहा है। खुशबू और उसकी पत्नी मोइज खान बैंक खातों के अलावा फर्जी पतों पर सिमकार्ड बनाते हैं। चौधरी संजय कुमार की जिम्मेदारी है नकली पतों पर बैंक खाते खुलवाकर धन को विनिमय करना। जय भी आरोपियों को फर्जी कागजातों पर बैंक खाते देता है। आसिफ रुपयों को अमेरिकी डॉलर में बदलकर क्रिप्टो और बिटकाइन खरीदता है और फिर उनसे बाहर भेजता है। उसे कमीशन मिलता है।

सावधानी 

कूरियर कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर एक एडवाइजरी जारी कर कहा कि वह किसी भी व्यक्ति से बैंक या निजी जानकारी नहीं मांगेगी। यदि आपके पास कंपनी के नाम से कोई कॉल या मैसेज आया है, तो इसकी तुरंत शिकायत करें। इसके साथ किसी भी लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए। आईवीआर के विकल्प पर भी चर्चा न करें।

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