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मार्कोज: क्या है मरीन कमांडो फोर्स मार्कोज, जो अरब सागर में हाईजैक शिप को छुड़ाने भेजा गया था; क्या खतरा है? {06-01-2024}

कैसे मार्कोज कमांडो चुने जाते हैं?

हाईजैकर्स को मार गिराना और सभी क्रू सदस्यों की सुरक्षा

पूरे जहाज को नियंत्रण से बाहर निकालने के लिए नौसेना ने अपनी उन्नत मार्कोज टीम को भी उतारा। शिप में मौजूद हाईजैकर्स को मार गिराने के साथ-साथ सभी क्रू मेंबर्स की सुरक्षा करना इस टीम का काम था। ऐसे में, यह जानना महत्वपूर्ण है कि मार्कोज कमांडो आखिर कौन हैं?

भारत ने एक विशेष अभियान के तहत 24 घंटे के अंदर कार्गो शिप एमवी लीला नोर्फोक को अरब सागर में हाईजैक कर दिया था। शिप में सवार 15 भारतीयों समेत सभी 21 क्रू सदस्यों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है। नौसेना की मार्कोज टीम ने इस जहाज पर सैनिटाइजेशन ऑपरेशन चलाया।लेकिन शिप में सोमालियाई आतंकियों को नहीं पाया गया। भारतीय नौसेना ने चेतावनी दी, जिसके बाद हाईजैकर्स खतरे को भांपकर भाग निकले।

ब्रिटेन के मैरिटाइम ट्रैफिक ऑर्गनाइजेशन की सूचना

ब्रिटेन के मैरिटाइम ट्रैफिक ऑर्गनाइजेशन ने बताया कि पहले शिप पर पांच से छह हाईजैकर्स थे। लेकिन पंद्रह भारतीयों को बचाने के लिए भारतीय नौसेना ने प्रीडेटर एमक्यू9बी ड्रोन, एक युद्धपोत, मैरिटाइम पैट्रोल एयरक्राफ्ट, हेलीकॉप्टर्स और पी-8आई लॉन्ग रेंज एयरक्राफ्ट भी भेजा था।

इसके अलावा, नौसेना ने पूरे जहाज को नियंत्रण से बाहर निकालने के लिए अपनी विशेषज्ञ मार्कोज टीम को भी उतारा। शिप में मौजूद हाईजैकर्स को मार डालने के साथ-साथ सभी क्रू सदस्यों की सुरक्षा करना इस टीम का काम था। यही कारण है कि मार्कोज कमांडो आखिर कौन हैं? इस टीम में शामिल लोग आम सैनिकों से कितने अलग हैं? इन्हें किस तरह के विशिष्ट कार्यक्रमों में शामिल किया जाता है? और वे किस प्रकार शिक्षित होते हैं?

मार्कोज का क्या अर्थ है?

1987 में, भारतीय नौसेना में इलीट कमांडो फोर्स मार्कोज बनाया गया था। नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स (एनएसजी), वायुसेना की गरुड़ और थलसेना की पैरा स्पेशल फोर्स देश की पहली सुरक्षा बल थीं। मार्कोज या मरीन कमांडो फोर्स में नौसेना के सबसे कठिन ट्रेनिंग प्राप्त सैनिकों से बना बल है। अमेरिका की महान नेवी सील्स, जिसने कई बार समुद्र में पाइरेसी की कोशिश की, मार्कोज की प्रक्रिया से बहुत मिलता-जुलता है।

कैसे मार्कोज कमांडो चुने जाते हैं?

पहला चरण

इस इलीट कमांडो फोर्स में पहला चरण चुनना इतना आसान नहीं है। इसमें भारतीय नौसेना में काम कर रहे युवा लोगों को शामिल किया जाता है, जो कठिन परिस्थितियों में अपनी क्षमता दिखा चुके हैं। बताया जाता है कि चयन के दौरान जवानों की पहचान के लिए किए जाने वाले टेस्टों में से 80% से अधिक उसी समय बाहर हो जाते हैं।

दूसरा चरण

बाद में दूसरा चरण, जिसे इनिशियल क्वालिफिकेशन ट्रेनिंग कहा जाता है, में दस हफ्तों का परीक्षण होता है। इससे ट्रेनी को रात भर जागकर कई दिनों तक अभियान में जुटे रहने की क्षमता विकसित करने का प्रशिक्षण मिलता है। सैनिकों को कई दिनों तक सिर्फ दो या तीन घंटे की नींद लेकर काम करना पड़ता है। पहली स्क्रीनिंग को पार करने वाले 20% लोगों में से अधिकांश इस इन परीक्षाओं में थककर बाहर हो जाते हैं। जिन लोगों को बचाया जाता है, वे खतरनाक ट्रेनिंग करते हैं, जो मजेदार है।

तीसरा चरण

तीसरा चरण है एडवांस ट्रेनिंग। इस चरण में, पहले दो चरणों से बच गए कुछ ही नौसैनिकों को मौका मिलता है। इस प्रशिक्षण का अवधि तीन वर्ष है। जवानों को हथियारों, खाने और पीने के बोझ के साथ पहाड़ चढ़ने की ट्रेनिंग, दलदल में भागने की ट्रेनिंग और आसमान, जमीन और पानी में दुश्मनों को मारने की ट्रेनिंग दी गई।

चौथा चरण

जवानों को चौथा चरण की ट्रेनिंग में अत्याधुनिक हथियार चलाना सिखाया जाता है। उन्हें धनुष-बाण और तलवारबाजी के प्रशिक्षण भी मिलता है। मार्कोज में कमांडो को विषम से विषम हालात में ध्यान केंद्रित करना सिखाया जाता है। टॉर्चर से लेकर साथी नौसैनिकों की मौत के दौरान मिशन की कामयाबी सुनिश्चित करने के लिए इन जवानों को मानसिक बल दिया जाता है।

जवानों को इस दौरान सबसे कठिन प्रशिक्षण हालो और हाहो ट्रेनिंग कहा जाता है। कमांडो को हालो कद के तहत लगभग 11 किलोमीटर की ऊंचाई से कूदना होता है। वहीं, युवा लोग हाहो में आठ किलोमीटर की ऊंचाई से कूदते हैं। जवानों को कूद से सिर्फ ट्रेनिंग के दौरान जवानों को ट्रेनिंग के दौरान कूद से आठ सेकंड बाद ही पैराशूट खोलना होता है।

क्या काम करते हैं?

नौसेना की इस विशिष्ट टुकड़ी का लक्ष्य कांउटर टेररिज्म, एक जगह का विशेष निरीक्षण, अनकंवेंशनल वॉरफेयर (जैसे केमिकल-बायोलॉजिकल अटैक), बंधकों को छुड़ाना, जवानों को बचाना और विशिष्ट ऑपरेशनों को पूरा करना है। मार्कोज के युवा लोगों को समुद्री डकैती, समुद्री घुसपैठ और हवाई जहाज की हाईजैकिंग की ट्रेनिंग दी जाती है। इस बल की सबसे खतरनाक बात है उनकी गुप्त पहचान। ये युवा गुपचुप रूप से विशेष अभियानों में भाग लेते हैं, जो यानी नौसेना के सामान्य ऑपरेशन में शामिल होते हैं।

मार्कोज का नारा

The Few, the Fewer। इस महान सेना का नाम ऑपरेशन कैक्टस द फ्यू, द फियरलेस है, मार्कोज का नारा है। इस महान बल के पास ऑपरेशन कैक्टस, लीच, पवन और चक्रवात के खतरों से निपटने के लिए कई विशेषताएं हैं। मार्कोज ने ऑपरेशन कैक्टस के दौरान मालदीव में रातोंरात तख्तापलट की कोशिशों को रोका था। इस दौरान इस बल ने आम लोगों को जेल से छुड़ाया था।

भारत में इस बल की चर्चा 26 नवंबर 2011 के मुंबई हमलों के बाद शुरू हुई, जब बल ने ताज होटल से आतंकियों को मार गिराने में मदद करने के लिए ऑपरेशन ब्लैक टॉरनेटो शुरू किया था। इतना ही नहीं, 1980 के दौरान श्रीलंका के गृहयुद्ध के दौरान इस महान सेना ने ऑपरेशन पवन चलाया, जो लिट्टे के कब्जे वाले कई क्षेत्रों को मुक्त कर दिया।

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नौसेना ने अगवा जहाज की निगरानी करने के लिए एयरक्राफ्ट लगाए हैं। तीसरे जहाज के क्रू से भी बातचीत की गई है। नौसेना ने आईएनएस चेन्नई नामक एक युद्धक जहाज को भी अगवा जहाज की ओर रवाना किया है। पुरा पढ़े

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