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हरियाणा: पीएमश्री योजना का शुभारंभ {26-10-2023}

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हरियाणा: पीएमश्री योजना का शुभारंभ

हरियाणा: पहला राज्य जहां पीएमश्री योजना शुरू हुई:-

Haryana: पीएमश्री योजना शुरू करने वाला हरियाणा देश का पहला राज्य बना, 124 स्कूलों को अपग्रेड किया गया
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एमडीयू के टैगोर सभागार में मुख्यमंत्री मनोहरलाल के साथ रिमोट से पीएमश्री योजना का शुभारंभ किया। योजना केहत 124 स्कूलों को अपग्रेड किया गया है। इससे अध्ययन के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। पीएमश्री योजना शुरू करने वाला हरियाणा देश का पहला राज्य बन गया है।

हरियाणा: पीएमश्री योजना का शुभारंभ

124 स्कूलों में अपग्रेडेशन के साथ सुविधाएं बढ़ीं:-

योजना के तहत प्रदे के 124 स्कूलों को अपग्रेड किया गया है। यहां अध्ययन के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। अब प्रदेश के सरकारी स्कूलों का भी मानकीकरण (एक्रेडिटेशन) से संभव होगा। यह बात केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कही।

सैच एप्लिकेशन का विमोचन

स्कूलों की सुविधाएं और जानकारी के लिए सैच एप लॉन्च:-

वह बुधवार को एमडीयू के टैगोर सभागार में स्कूलों के मानकीकरण (एक्रेडिटेशन) के लिए तैयार की गई सैच (एसएसीएच) एप लांच करने के साथ पीएमश्री स्कूलों का शुभारंभ कर रहे थे।

उन्हाेंने कहा कि विश्वविद्यालय व महाविद्यालयों की तरह घर बैठे किसी भी स्कूल की सुविधाओं व अन्य जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए देश में पहली बार सैच (एसएसीएच) एप लांच की गई है। देश में शिक्षा का स्तर बेहतर बनाने के लिए शिक्षा प्रणाली में आधारभूत बदलाव किया जा रहा है।

शिक्षा में नवाचार

पीएमश्री स्कूल और टैबलेट के माध्यम से अध्ययन की गुणवत्ता में सुधार:-

पीएमश्री स्कूल इसी का हिस्सा है। यह नई पहल भावी पीढ़ी को बेहतर भविष्य देगी। यहां अध्ययन की बेहतर सुविधाएं मुहैया होंगी। सरकार ने विद्यार्थियों को टैबलेट के जरिए पढ़ाने का भी अच्छा प्रयास किया है।

हरियाणा के शिक्षा परिवर्तन

शिक्षकों की नियुक्ति और तबादला में पारदर्शिता और तकनीकी अद्यतन:-

उन्होंने कहाा कि हरियाणा में शिक्षक की नियुक्ति और तबादला एक उद्योग था। इसे मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पारदर्शी ऑनलाइन नीति के जरिए देश में मिसाल कायम की है। इन तबादलों के प्रति 90 प्रतिशत लोगों ने संतुष्टि जाहिर की है। यहां शिक्षा विभाग की ओर से टैगोर सभागार में आयोजित प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

पैरा एशियाई खेल में हरियाणा की प्रतिभा

हरियाणा के खिलाड़ीयों के शानदार प्रदर्शन और उनकी उपलब्धियां:-

चीन के हांगझोऊ में चल रही पैरा एशियाई खेलों में हरियाणवियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। बुधवार को सोनीपत के गांव खेवड़ा के सुमित ने भाला फेंक में नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने एफ-64 स्पर्धा में 73.29 मीटर दूर भाला फेंककर अपना ही पुराना रिकॉर्ड (70.83 मीटर) को तोड़ा। तीसरे दिन भारत ने कुल 30 पदक जीते। इनमें हरियाणा के खिलाड़ियों के खाते में पांच पदक आए।

 

हरियाणा के चार खिलाड़ियों ने व्यक्तिगत स्पर्धा में दो स्वर्ण व दो रजत व टीम इवेंट में एक कांस्य पदक जीता। प्रतियोगिता में हरियाणा के खिलाड़ी अब तक 16 पदक हासिल कर चुके हैं। पहले दिन सात व दूसरे दिन चार खिलाड़ियों ने जीत हासिल की थी। सुमित के अलावा झज्जर के गांव गोरिया के हनी गोरिया ने भी 55.97 मीटर भाला फेंककर स्वर्ण पदक जीता। इनके अलावा रेवाड़ी की पूजा ने डिस्कस थ्रो में रजत, तीरंदाजी में हिसार के प्रमोद कुमार ने रजत औैर तीरंदाजी के ही रिकर्व डबल इवेंट पुरुष में चीका के हरविंद्र और रोहतक के साहिल ने कांस्य जीता।

खिलाड़ी की कहानियां

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पूजा यादव: अद्वितीय संघर्ष और विजयी जीवन:-

रेवाड़ी के कस्बा धारूहेड़ा की पूजा यादव ने एफ-54/55 श्रेणी में डिस्कस थ्रो में रजत पदक जीता। पूजा बचपन में कुएं में गिर गई थीं। इससे उनकी रीढ़ में चोट आ गई थी। वह कई वर्ष तक बिस्तर पर ही रहीं। इसके बाद उन्होंने हिम्मत दिखाते हुए वर्ष 2017 से खेलों में हिस्सा लेना आरंभ किया था।

पूजा यादव:
पूजा यादव: अद्वितीय संघर्ष और विजयी जीवन:

 

हरविंद्र सिंह व साहिल: मेरे लिए गर्व का क्षण:-

तीरंदाजी प्रतियोगिता में चीका के अजीत नगर निवासी हरविंद्र सिंह ने कांस्य जीतने के बाद सोशल मीडिया पर लिखा-यह वास्तव में मेरे लिए गर्व का क्षण है। मेरे कोच जीवन जोत सिंह तेजा और गौरव शर्मा को धन्यवाद। यह उपलब्धि जीवन भर मेरे लिए प्रेरणा बनी रहेगी और भविष्य में मुझे सफलता प्राप्त करने में मदद करेगी। टीम इवेंट में उनके साथ रोहतक के साहिल थे।

हरविंद्र सिंह व साहिल: मेरे लिए गर्व का क्षण
हरविंद्र सिंह व साहिल: मेरे लिए गर्व का क्षण

Four out of Five

प्रमोद: 4.09 मिनट में पूरी की दौड़, तोड़ा रिकॉर्ड:-

सिरसा जिले के नहराना गांव के प्रमोद ने 4 मिनट 9 सेकेंड में दौड़ पूरी कर अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया। अमके पिता राममूम्ति खेतीबाडटी करते हैं। दिव्यांग होने के बावजूद सुबह और शाम 6 घंटे अभ्यास करते हैं। उनका पहला रिकॉर्ड 4 मिनट 12 सेकेंड का था।

हनी: स्वर्ण के पीछे दो साल की मेहनत:-

झज्जर के गांव गोरिया के हनी गोरिया के कोच सुनील फोगाट ने बताया कि हनी दो साल से वह उनके पास अभ्यास कर रहे थे। उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में 55.97 मीटर का सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड निकाला। पैरा ओलंपिक में गोल्ड जीतना उसका एकमात्र सपना है। वह और अधिक मेहनत करेगा ताकि ओलंपिक में भी स्वर्ण पदक मिले।

हनी: स्वर्ण के पीछे दो साल की मेहनत
हनी: स्वर्ण के पीछे दो साल की मेहनत

 

 

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